महिला अधिकार एवं कानूनी सुरक्षा पर राष्ट्रीय वेबिनार
महिला अधिकार एवं कानूनी सुरक्षा पर राष्ट्रीय वेबिनार
मानव गरिमा से सामाजिक न्याय तक: NHRCCB द्वारा “Universal Declaration of Human Rights” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न
नई दिल्ली/भारत।
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) द्वारा दिनांक 12 अप्रैल 2026 को “Universal Declaration of Human Rights” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर का ऑनलाइन वेबिनार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और उत्तरदायित्व का एक जीवंत मंच बनकर उभरा। यह आयोजन उस मूल प्रश्न को पुनः सामने लाता है कि—क्या मानवाधिकार केवल कानून की धाराओं में सीमित हैं, या वे समाज की आत्मा और व्यवहार में भी प्रतिबिंबित होने चाहिए?
वेबिनार के मुख्य वक्ता , माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानवाधिकारों की अवधारणा किसी एक राष्ट्र या समय की देन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की सतत चेतना का परिणाम है। उन्होंने इस बात पर गहन प्रकाश डाला कि यदि अधिकारों की चर्चा कर्तव्यों से अलग हो जाए, तो संतुलन भंग हो जाता है और वहीं से अन्याय की शुरुआत होती है। उनके शब्दों में—“मानवाधिकार केवल संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि आत्मानुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी दर्पण हैं।”
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अपराध नियंत्रण और मानवाधिकार एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक तत्व हैं, जिनके बीच संतुलन ही एक न्यायपूर्ण व्यवस्था की नींव रखता है। पीपीटी के माध्यम से मानव अधिकार के सार्वभौमिक घोषणापत्र को बेहद ही सरलतापूर्वक समझाया एवं इसके 30 अनुच्छेद पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी ।
वेबिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष श्री मोहिंदर पाल धानिया ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज में अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकता और नैतिक आचरण से सुनिश्चित होती है। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार में संवेदनशीलता और समानता को स्थान देता है, तभी मानवाधिकारों की वास्तविक भावना जीवंत होती है।
वेबिनार का संचालन राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर द्वारा अत्यंत संतुलित एवं प्रभावी ढंग से किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जागरूक नागरिक बड़ी संख्या में जुड़े। चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आज के डिजिटल और बदलते सामाजिक परिवेश में मानवाधिकारों की परिभाषा और भी व्यापक हो गई है—अब यह केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि गरिमा, अभिव्यक्ति, निजता और समान अवसरों से भी गहराई से जुड़ा हुआ विषय है।
प्रश्नोत्तर सत्र में व्यावहारिक प्रश्नों ने इस विमर्श को और अधिक यथार्थपरक बना दिया। इसमें यह बात उभरकर सामने आई कि मानवाधिकारों का वास्तविक परीक्षण न्यायालयों में नहीं, बल्कि समाज के दैनिक व्यवहार—परिवार, कार्यस्थल और सार्वजनिक जीवन—में होता है।
वेबिनार के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि मानवाधिकारों की रक्षा केवल कानूनों के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जागरूकता, संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
अंत में सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ तथा आगामी अंबेडकर जयंती के अवसर पर संविधान एवं मानवाधिकारों के प्रचार-प्रसार हेतु कार्यक्रम आयोजित करें।
यह वेबिनार न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि मानवाधिकारों के प्रति समाज में जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।
एन एच आर सी सी बी द्वारा "अपराध नियंत्रण में मानवाधिकार संगठनों की भूमिका " पर राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन।
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) के राष्ट्रीय कार्यालय द्वारा दिनांक 19 दिसंबर 2025 को “अपराध नियंत्रण में मानवाधिकार संगठनों की भूमिका” विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का सफल एवं प्रभावशाली आयोजन किया गया। यह वेबिनार सायं 07:30 बजे से 08:30 बजे तक आयोजित हुआ, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में पदाधिकारियों, सदस्यों एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।
वेबिनार के मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश प्रसाद वर्मा, डिप्टी कमांडेंट (समकक्ष – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक), गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने उद्बोधन में मानवाधिकारों की मूल अवधारणा, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं अपराध के वास्तविक कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने श्लोकों के माध्यम से मानवाधिकारों की भारतीय दृष्टि को रेखांकित करते हुए यह स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण केवल दंड से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, नैतिकता एवं पुनर्वासन से संभव है।
वेबिनार के दौरान जेल सुधार एवं कैदियों के पुनर्वासन, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मानवाधिकार, जागरूकता कार्यक्रम एवं काउंसलिंग की भूमिका, सत्ता के दुरुपयोग एवं राज्य प्रायोजित अपराधों की रोकथाम, निर्दोष व्यक्तियों को गलत सलाह या झूठे मामलों में फँसाए जाने की स्थिति में उनके बचाव, अवैध प्रवासन (Illegal Migration) की रोकथाम, आतंकवाद एवं उससे जुड़ी मानवाधिकार चुनौतियाँ जैसे अत्यंत गंभीर एवं समसामयिक मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।
वेबिनार की अध्यक्षता माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि मानवाधिकार संगठनों की भूमिका केवल प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें सुधार, पुनर्वासन एवं अपराध-निवारण की दिशा में ठोस पहल करनी होगी। संस्था के पहल पर अपराध नियंत्रण पर प्रभावी कदम उठाए जा चुके हैं। कई बेगुनाह को उनके अधिकारों की संरक्षण हुई है, दर्जनों मामलों पर उच्च स्तरीय जाँच हुई है एवं लगातार इस पर व्यापक कार्य हो रही है। देश के विभिन्न राज्यों में अपराध नियंत्रण के मामले मे कई जागरूकता कार्यक्रम एवं प्रसाशन के साथ मिल कर संगठनात्मक कार्य कर रही है।
मानवाधिकार संगठनों की भूमिका केवल प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें सुधार, पुनर्वासन एवं अपराध-निवारण की दिशा में ठोस पहल करनी होगी।
कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय समन्वयक श्री प्रभात कुमार द्वारा किया गया। वेबिनार के दौरान देश के विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लेते हुए अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए, जिससे कार्यक्रम और अधिक प्रभावी एवं सार्थक बना।
वेबिनार का उद्देश्य एन एच आर सी सी बी के सदस्यों एवं पदाधिकारियों को नीति, संवेदना एवं कानून के समन्वय से अपराध नियंत्रण में एक सशक्त भूमिका निभाने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करना रहा, जिसमें यह आयोजन पूर्णतः सफल सिद्ध हुआ।
राष्ट्रीय कार्यालय ने सभी पदाधिकारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के विषय-आधारित, जागरूकता एवं क्षमता-विकास कार्यक्रमों के आयोजन की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
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